चंडीगढ़, 31 अगस्त (कुलदीप सैनी)। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRNL) को लेकर विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि निगम के गठन से प्रदेश में दशकों पुरानी ठेकेदार आधारित कर्मचारी व्यवस्था में व्याप्त बिचौलियापन, दलाली, शोषण और अपारदर्शिता को समाप्त किया गया है। अब संविदा कर्मचारियों की भर्ती और तैनाती को नियम, योग्यता, पारदर्शिता और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा गया है।
मुख्यमंत्री सोमवार को हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान हरियाणा कौशल रोजगार निगम से संबंधित ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पहले ठेकेदारों के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों का बड़े स्तर पर शोषण होता था। कई कर्मचारियों को पूरा वेतन नहीं मिलता था और ठेकेदार वेतन में कटौती कर देते थे। कई मामलों में 12 महीने के बजाय 11 महीने का वेतन यह कहकर दिया जाता था कि सेवा का नवीनीकरण किया जा रहा है।
‘विपक्ष अधूरे रिकॉर्ड के आधार पर कर रहा राजनीति’
सीएम सैनी ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के रूप में देख रहा है, जबकि सरकार प्रदेश के युवाओं, कर्मचारियों और उनके परिवारों के हित में व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि संविदात्मक रोजगार की व्यवस्था वर्तमान सरकार ने शुरू नहीं की, बल्कि यह हरियाणा गठन के समय से ही अलग-अलग रूपों में चली आ रही है।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग झूठ बोलने और भ्रम फैलाने में सबसे आगे हैं। प्रदेश की जनता सच्चाई और झूठ के बीच अंतर समझती है। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पहले चुनावों को ध्यान में रखकर सरकार और व्यवस्थाएं चलाने की कोशिश होती थी, जबकि मौजूदा सरकार व्यवस्था में सुधार और कर्मचारी हित को प्राथमिकता दे रही है।
1967 में भी थे 11,397 संविदा व अन्य श्रेणी के कर्मचारी
मुख्यमंत्री ने सदन में सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 31 मार्च 1967 को हरियाणा सरकार के कुल 97,385 कर्मचारियों में 11,397 कर्मचारी कंटिन्जेंसी पेड, वर्कचार्ज्ड एवं कॉन्ट्रैक्ट आधार वाली संयुक्त श्रेणी में थे। वर्ष 2013 तक इस श्रेणी के कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 84,642 हो गई थी।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1967 से 2005 तक 38 वर्षों में इस श्रेणी में 27,552 कर्मचारियों की वृद्धि हुई, जबकि वर्ष 2005 से 2014 के दौरान महज नौ वर्षों में इनकी संख्या करीब 71 हजार बढ़ी। वर्ष 2014 में अनुबंध आधारित कर्मचारियों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई थी।
सीएम ने विपक्ष से सवाल किया कि यदि संविदात्मक व्यवस्था इतनी बड़ी समस्या थी तो कांग्रेस शासन के दौरान इसमें इतनी तेजी से वृद्धि क्यों हुई। उन्होंने कहा कि सरकार ने पुरानी व्यवस्था को खत्म कर कर्मचारियों को ठेकेदार की मनमर्जी से बाहर निकालने का काम किया है।
अब पोर्टल पर पंजीकरण, योग्यता के आधार पर तैनाती
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले नौकरी, वेतन और पीएफ जैसी सुविधाओं के लिए कर्मचारी ठेकेदार पर निर्भर रहते थे। ठेकेदारों द्वारा ईपीएफ की राशि काटने के बावजूद उसे जमा नहीं करने, वेतन पर्ची नहीं देने और पीएफ नंबर जारी नहीं करने जैसी शिकायतें सामने आती थीं।
उन्होंने कहा कि HKRNL के माध्यम से युवाओं को तकनीक आधारित पारदर्शी व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। अब युवा निगम के पोर्टल पर स्वयं पंजीकरण करते हैं और निर्धारित पात्रता एवं योग्यता के आधार पर उनकी तैनाती की जाती है। इसके लिए ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ लागू की गई है।
समान श्रेणी के काम के लिए समान वेतन
सीएम ने कहा कि पुरानी ठेकेदार आधारित व्यवस्था में अलग-अलग विभागों और ठेकेदारों के माध्यम से लगे कर्मचारियों के वेतन में एकरूपता नहीं थी। कई बार समान काम करने वाले कर्मचारियों को अलग-अलग वेतन मिलता था। HKRNL के गठन के बाद 19 जनवरी 2022 से समान वेतन दरें लागू की गईं और मानकीकृत वेतन ढांचा तैयार किया गया।
उन्होंने बताया कि 9 अप्रैल 2026 से लागू श्रम दरों के अनुसार अकुशल कर्मचारी के लिए 15,220.71 रुपये, अर्धकुशल के लिए 16,780.74 रुपये और कुशल कर्मचारी के लिए 18,500.81 रुपये प्रतिमाह की दर निर्धारित है। वर्ष 2014 में अकुशल कर्मचारी की 5,640 रुपये की दर की तुलना में वर्तमान दर करीब 2.7 गुना है।
1,316 डी.डी.ओ. शिफ्टिंग और 306 को अनुकम्पा आधार पर रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविदा कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण और डी.डी.ओ. शिफ्टिंग की भी व्यवस्थित व्यवस्था की गई है। अब तक 1,316 डी.डी.ओ. शिफ्टिंग के मामले स्वीकृत किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि ‘Deployment of Contractual Persons Policy-2022’ के तहत संविदा कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर पात्र आश्रित को अनुकम्पा आधार पर रोजगार देने का प्रावधान किया गया है। अब तक 306 पात्र अभ्यर्थियों को अनुकम्पा आधार पर रोजगार दिया जा चुका है। परिवार को तीन लाख रुपये की अनुकम्पा सहायता अथवा अनुकम्पा तैनाती में से एक विकल्प चुनने की सुविधा भी दी गई है।
महिला कर्मचारियों को प्रसूति व अन्य अवकाश का लाभ
सीएम ने कहा कि महिला संविदा कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रसूति अवकाश का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा एक कैलेंडर वर्ष में 10 चिकित्सा अवकाश और 10 आकस्मिक अवकाश का प्रावधान है। महिला कर्मचारियों को 22 दिन आकस्मिक अवकाश का लाभ भी दिया जा रहा है।
ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि से जोड़ा
मुख्यमंत्री ने कहा कि HKRNL के माध्यम से संविदा कर्मचारियों को ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि की सामाजिक सुरक्षा से जोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि 15 हजार रुपये प्रतिमाह तक की लागू वैधानिक वेतन सीमा में कर्मचारी का ईपीएफ अंशदान 12 प्रतिशत तथा नियोक्ता का अंशदान 13 प्रतिशत जमा किया जाता है। वहीं 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले कर्मचारियों के लिए ईएसआई के तहत कर्मचारी का अंशदान 0.75 प्रतिशत और नियोक्ता का 3.25 प्रतिशत निर्धारित है।
उन्होंने बताया कि अब तक करीब 2,100 करोड़ रुपये ईपीएफ, ईएसआई और श्रम कल्याण निधि के रूप में जमा किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कर्मचारियों का ईपीएफ काटे जाने के बाद उनके खातों में जमा किया जा रहा है और इसकी निगरानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।
ठेकेदार कमीशन की जगह 0.5 प्रतिशत निगम शुल्क
सीएम सैनी ने कहा कि पुरानी व्यवस्था में ठेकेदार कुल बिल राशि पर करीब 2 प्रतिशत कमीशन लेते थे। इसके मुकाबले HKRNL द्वारा केवल 0.5 प्रतिशत निगम शुल्क लिया जाता है। उन्होंने बताया कि निगम की स्थापना के बाद अब तक 81.44 करोड़ रुपये निगम शुल्क के रूप में प्राप्त हुए हैं। यदि यही राशि पुरानी व्यवस्था के तहत 2 प्रतिशत कमीशन के रूप में दी जाती तो करीब 160 करोड़ रुपये खर्च होते। इस प्रकार लगभग 78.56 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत हुई है।
संविदा कर्मचारियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का भी लाभ
मुख्यमंत्री ने बताया कि 21 हजार रुपये तक मासिक वेतन वाले संविदा कर्मचारियों को ईएसआईसी के माध्यम से चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। इससे अधिक वेतन वाले कर्मचारियों को चिरायु योजना के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल ठेकेदार की भूमिका समाप्त करना नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था को बदलना है जिसमें एक युवा की योग्यता और रोजगार के बीच बिचौलिया खड़ा रहता था। HKRNL के माध्यम से भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के साथ कर्मचारियों को वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं से जोड़ने का काम किया गया है।
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