आयुष चिकित्सा को बढ़ावा देने पर जोर, प्रदेश में 1771 स्वास्थ्य शिविरों में 10,900 से अधिक लोगों की जांच

Navdesh Times
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चंडीगढ़, 11 अगस्त (कुलदीप सैनी)। हरियाणा की स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान तथा आयुष मंत्री आरती सिंह राव ने कहा कि आयुष चिकित्सा पद्धतियां असाध्य एवं क्रोनिक रोगों के उपचार के साथ-साथ उनकी रोकथाम में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लोगों से आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी जैसी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अपनाने की अपील की।

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में हाल ही में आयोजित अभियान के दौरान आयुष विभाग ने करीब 1,771 स्वास्थ्य शिविर लगाए, जिनमें 10,900 से अधिक लोगों की नि:शुल्क स्वास्थ्य जांच कर उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिया गया।

प्रदेश में मजबूत किया जा रहा आयुष ढांचा

आरती सिंह राव ने बताया कि ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए सरकार ने प्रदेश में चार बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल संचालित किए हैं। इसके अलावा पलवल के सिहोल में यूनानी और अंबाला के चांदपुरा में होम्योपैथिक अस्पताल भी सेवाएं दे रहे हैं।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में 515 आयुर्वेदिक, 16 यूनानी और 24 होम्योपैथिक औषधालय संचालित हैं। इसके साथ ही आयुर्वेदिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, पंचकर्म केंद्र और आयुष विंग के माध्यम से भी लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंची आयुष सेवाएं

मंत्री के अनुसार राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत जिला अस्पतालों में 21 आयुष विंग, CHC स्तर पर 102 आयुष IPD और PHC स्तर पर 106 आयुष OPD संचालित हैं। इनमें से अधिकांश स्वास्थ्य सुविधाएं ग्रामीण एवं दुर्गम क्षेत्रों में हैं।

उन्होंने बताया कि कुरुक्षेत्र स्थित श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय के माध्यम से आयुष शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश में एक सरकारी और 12 निजी आयुर्वेदिक कॉलेज भी संचालित हैं।

आरती सिंह राव ने कहा कि आयुष पद्धतियां भारत की प्राचीन चिकित्सा परंपरा का हिस्सा हैं और लोगों को निरोगी एवं स्वस्थ जीवन के लिए इन्हें अपनी जीवनशैली में शामिल करना चाहिए।

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