यमुनानगर/छछरौली। कुछ तस्वीरें सिर्फ तस्वीरें नहीं होतीं, वे भावनाओं, त्याग और जिम्मेदारी की पूरी कहानी बयां करती हैं। यमुनानगर के छछरौली क्षेत्र के गांव शेरपुर से सामने आई ऐसी ही एक तस्वीर ने हर किसी को भावुक कर दिया। यह तस्वीर है सात वर्षीय आयांश की, जिसने महज सात साल की उम्र में अपने पिता को खो दिया। आयांश के पिता शहीद सुधीर नरवाल देश की रक्षा करते हुए जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए आतंकी हमले में 22 जुलाई 2026 को शहीद हो गए थे।
पिता की शहादत के बाद परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
शहीद सुधीर नरवाल के बलिदान से परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई थी। एक ओर देश की रक्षा करते हुए वीर जवान की शहादत पर हर किसी को गर्व था, तो दूसरी ओर परिवार ने अपना एक अनमोल सदस्य खो दिया था। सबसे ज्यादा असर उनके मासूम बेटे आयांश पर पड़ा, जिसने इतनी छोटी उम्र में पिता का साया खो दिया।
समय बीतने के साथ परिवार अपने इस गहरे दुख से उबरने की कोशिश कर रहा है। इसी बीच प्रशासन की ओर से उठाया गया एक संवेदनशील कदम परिवार के लिए हौसले का सहारा बनकर सामने आया है।
सात साल के आयांश को मिला सम्मान
हरियाणा राज्य अनुसूचित जाति आयोग की चेयरपर्सन बंतो कटारिया ने शहीद सुधीर नरवाल के बेटे आयांश का सम्मान किया। सात वर्षीय आयांश के लिए यह सम्मान केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि उसके पिता के बलिदान को नमन करने और परिवार के साथ खड़े होने का संदेश है।
आयांश की मासूम आंखों और चेहरे पर पिता की यादों के बीच मिला यह सम्मान हर किसी को भावुक कर गया। यह पल इस बात का प्रतीक बना कि शहीद जवान भले ही देश की रक्षा करते हुए दुनिया से चले जाते हैं, लेकिन उनके परिवार और उनके बच्चों के प्रति समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी हमेशा बनी रहती है।
सम्मान का संदेश: शहीद सुधीर नरवाल का बलिदान देश कभी नहीं भूलेगा। उनके परिवार के साथ खड़ा होना और उनके बच्चों का सम्मान करना पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
शहादत को नमन, परिवार के साथ खड़ा प्रशासन
शहीद सुधीर नरवाल की वीरता और बलिदान को पूरा छछरौली क्षेत्र नमन कर रहा है। प्रशासन की इस पहल ने यह संदेश भी दिया कि शहीद परिवार अकेला नहीं है। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले जवानों के परिवारों के सम्मान और सहयोग के लिए समाज और प्रशासन को हमेशा उनके साथ खड़ा रहना चाहिए।
आयांश अभी सिर्फ सात साल का है। उसके लिए पिता की कमी शायद शब्दों में कभी पूरी नहीं हो सकती, लेकिन जब समाज और प्रशासन उसके साथ खड़ा दिखाई देता है, तो यह उसके परिवार को यह भरोसा जरूर देता है कि शहीद सुधीर नरवाल की शहादत को देश और समाज हमेशा याद रखेगा।
शहीद की शहादत को सलाम
गांव शेरपुर के शहीद सुधीर नरवाल की कहानी केवल एक जवान की शहादत की कहानी नहीं, बल्कि उस परिवार के त्याग की भी कहानी है, जिसने देश की रक्षा के लिए अपने बेटे, पति और पिता को खो दिया। सात वर्षीय आयांश का सम्मान उसी त्याग को नमन करने का एक भावुक और सम्मानजनक प्रयास है।
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