Haryana Prime Khasra : हरियाणा में प्राइम खसरों की पहचान होगी डिजिटल, सरकार ने मंजूर किया नया मॉड्यूल

Navdesh Times
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चंडीगढ़, 12 अगस्त (कुलदीप सैनी)। हरियाणा सरकार ने प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिन्हित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को मंजूरी दे दी है। इससे प्रदेशभर में प्राइम खसरा निर्धारित करने की प्रक्रिया एक समान, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से लागू की जा सकेगी।

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने राजस्व हरियाणा पोर्टल पर प्राइम खसरा मॉड्यूल के साथ इसके संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) और उपयोगकर्ता पुस्तिका (User Manual) को भी मंजूरी दी है।

क्या है प्राइम खसरा मॉड्यूल?

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की वित्तीय आयुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि प्राइम खसरों की पहचान और उन्हें चिन्हित करने के उद्देश्य से यह मॉड्यूल विकसित किया गया है।

इसके तहत अधिकृत राजस्व अधिकारी संबंधित भूमि रिकॉर्ड की जांच करने के बाद आवश्यक दस्तावेज अपलोड कर सकेंगे। इसके आधार पर प्राइम खसरे का चयन और निर्धारण किया जा सकेगा।

नई डिजिटल व्यवस्था से प्राइम खसरे के सत्यापन और निर्धारण की प्रक्रिया को एक तय प्रणाली के तहत संचालित किया जाएगा।

प्राइम खसरा मॉड्यूल से क्या होगा फायदा?

विभाग के अनुसार इस व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य प्राइम खसरा निर्धारण की प्रक्रिया में एकरूपता और पारदर्शिता लाना है। साथ ही इससे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटल प्रबंधन को भी मजबूती मिलेगी।

अधिकारियों को प्राइम खसरे के सत्यापन, आवश्यक दस्तावेज तैयार करने और उसे निर्धारित करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध होगी। इससे अलग-अलग जिलों या क्षेत्रों में अलग-अलग प्रक्रिया अपनाने की आवश्यकता नहीं रहेगी।

SOP और User Manual को मिली मंजूरी

सभी जिलों में प्राइम खसरा मॉड्यूल का एक समान इस्तेमाल सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) को मंजूरी दी है।

SOP में मॉड्यूल के इस्तेमाल की पूरी प्रक्रिया के साथ-साथ संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारियों का विवरण दिया गया है।

इसके अलावा अधिकारियों की सुविधा के लिए User Manual Version 1.0 को भी मंजूरी दी गई है। इसमें मॉड्यूल के संचालन के लिए चरणबद्ध निर्देश और स्क्रीनशॉट उपलब्ध कराए गए हैं।

विभाग ने बताया कि इन दस्तावेजों को विभागीय स्तर पर जांच के बाद तैयार किया गया है। मॉड्यूल का परीक्षण भी किया जा चुका है। इसके साथ परीक्षण मामलों और सुरक्षा प्रमाण-पत्र से संबंधित दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं।

राजस्व अधिकारियों तक पहुंचेंगे दिशा-निर्देश

डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि स्वीकृत SOP और User Manual को मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों, उपमंडल अधिकारियों (नागरिक), तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों तक पहुंचाया जाएगा।

इससे संबंधित अधिकारियों को प्राइम खसरा मॉड्यूल के इस्तेमाल और इसके तहत की जाने वाली कार्रवाई को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश मिल सकेंगे।

विभागीय पोर्टल पर भी इन दस्तावेजों को अपलोड किया जाएगा, ताकि अधिकारी आवश्यकता के समय इन्हें देख सकें। साथ ही इनका उपयोग प्रशिक्षण और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी किया जा सकेगा।

डिजिटल राजस्व प्रशासन को मिलेगी मजबूती

डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि प्राइम खसरा मॉड्यूल की मंजूरी हरियाणा में डिजिटल राजस्व प्रशासन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

नई व्यवस्था के तहत प्राइम खसरों की पहचान और निर्धारण के लिए एक तय एवं पारदर्शी डिजिटल प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इसमें संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजों को प्रक्रिया का हिस्सा बनाया गया है।

इससे प्रदेश में भूमि रिकॉर्ड के प्रबंधन में एकरूपता आने के साथ राजस्व अधिकारियों के लिए प्राइम खसरा निर्धारित करने की प्रक्रिया भी अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित होगी।

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