रादौर, 27 अगस्त (कुलदीप सैनी)। रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही रादौर के बाजारों में राखियों की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर फूलों वाली, मोदी जी वाली, कार्टून, रुद्राक्ष और चांदी की राखियों सहित कई तरह की आकर्षक राखियां ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही हैं। हालांकि पर्व में कुछ ही दिन शेष रहने के बावजूद बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही काफी कम दिखाई दे रही है। इससे स्थानीय दुकानदारों में मायूसी का माहौल है।
दुकानदारों का कहना है कि हर साल रक्षाबंधन से पहले बाजारों में राखी खरीदने वालों की अच्छी भीड़ देखने को मिलती थी, लेकिन इस बार ग्राहकी बेहद कमजोर है। दुकानदारों ने बताया कि उन्होंने अलग-अलग डिजाइन और कीमतों की राखियां मंगवाई हैं, लेकिन ग्राहक उम्मीद के मुताबिक खरीदारी करने नहीं पहुंच रहे हैं।
ऑनलाइन शॉपिंग और महंगाई को बताया बड़ी वजह
स्थानीय दुकानदारों और निवासियों के अनुसार बाजार में ग्राहकी कम होने के पीछे कई कारण हैं। इनमें ऑनलाइन शॉपिंग, बढ़ती महंगाई और बदलती जीवनशैली प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। लोगों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर घर बैठे राखियां और अन्य सामान आसानी से उपलब्ध होने के कारण स्थानीय बाजारों में खरीदारी का चलन प्रभावित हुआ है।
“पहले रक्षाबंधन से कई दिन पहले ही बाजार में राखी खरीदने वालों की भीड़ शुरू हो जाती थी, लेकिन इस बार ग्राहकी काफी कम है। ऑनलाइन शॉपिंग का असर भी बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है।” — सुरेंद्र दास स्थानीय दुकानदार
युवाओं में त्योहारों के प्रति घटते रुझान की भी चर्चा
कुछ स्थानीय निवासियों का कहना है कि युवा पीढ़ी में हिंदू संस्कृति और पारंपरिक त्योहारों के प्रति पहले जैसा उत्साह नहीं रहा है। इसके अलावा बदलती जीवनशैली के कारण भी त्योहारों की रौनक प्रभावित हो रही है।
“त्योहारों को लेकर पहले परिवारों में अलग ही उत्साह रहता था। अब युवाओं की पढ़ाई और रोजगार के कारण वे घर से दूर रहते हैं, जिससे त्योहारों की पुरानी रौनक कम होती जा रही है।” — अमित काम्बोज स्थानीय निवासी
एकल परिवारों का बढ़ता चलन भी असरदार
स्थानीय लोगों के अनुसार एकल परिवारों यानी न्यूक्लियर फैमिली का चलन बढ़ने और बच्चों के पढ़ाई या रोजगार के लिए देश-विदेश के अलग-अलग शहरों में चले जाने से भी भाई-बहन के इस पर्व पर पहले जैसी भीड़ और उत्साह देखने को नहीं मिलता।
दुकानदारों का कहना है कि रक्षाबंधन बिल्कुल नजदीक होने के बावजूद बाजार में ग्राहकों की कम संख्या चिंता का विषय है। दुकानदारों को उम्मीद है कि पर्व से एक-दो दिन पहले बाजार में खरीदारी बढ़ेगी और इस बार की मंदी कुछ हद तक दूर हो सकेगी।
“राखियों की कई नई वैरायटी बाजार में उपलब्ध हैं, लेकिन ग्राहकी उम्मीद के मुताबिक नहीं है। अब पर्व से पहले के दिनों में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।” — सुरदे दास स्थानीय दुकानदार
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