यमुनानगर, 25 अगस्त। महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध गंभीर अपराधों के मामलों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर अब सख्ती होगी। उपायुक्त प्रीति ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध, पोक्सो एक्ट, हत्या, बलात्कार और छेड़छाड़ जैसे गंभीर मामलों की जांच गंभीरता से की जाए और निर्धारित समय पर पुलिस चालान पेश कर पीड़ितों को नियमानुसार न्याय दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
उपायुक्त प्रीति मंगलवार को डीसी कार्यालय में चिन्हित अपराधों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में उन्होंने विभिन्न गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों की प्रगति की जानकारी ली और लंबित मामलों के जल्द निपटारे के लिए अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर हो मामलों की जांच
उपायुक्त ने कहा कि पोक्सो एक्ट के मामलों में विशेष गंभीरता बरती जाए, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। उन्होंने जांच अधिकारियों को वैज्ञानिक तथ्यों और ठोस साक्ष्यों के आधार पर जांच करने तथा सभी तथ्यों को मजबूती से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में पीड़ितों को समय पर न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिकता है। ऐसे मामलों की जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
सीसीटीवी और आधुनिक तकनीक से आरोपियों तक पहुंचे पुलिस
पुलिस अधीक्षक ने अधिकारियों को गंभीर एवं चिन्हित अपराधों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए आधुनिक तकनीक का अधिक से अधिक इस्तेमाल किया जाए।
विशेष रूप से चेन स्नैचिंग, मोबाइल स्नैचिंग और अन्य आपराधिक घटनाओं में सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल कर आरोपियों तक पहुंचने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मामले की जांच निष्पक्ष और निर्धारित समयावधि में पूरी की जाए तथा न्यायालय में मजबूत पैरवी कर दोषियों को कानून के अनुसार सजा दिलाना सुनिश्चित किया जाए।
42 पीड़ितों को 33.07 लाख रुपये की राहत राशि
बैठक में अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम, 1989 के तहत पीड़ितों को दी गई राहत राशि की भी जानकारी दी गई। उपायुक्त ने बताया कि इस अधिनियम के तहत 42 पीड़ितों को कुल 33 लाख 7 हजार 500 रुपये की राहत राशि प्रदान की गई है।
उन्होंने संबंधित विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र पीड़ितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है।
अपराधियों में कानून का भय पैदा करना जरूरी
उपायुक्त ने कहा कि आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ अपराधियों में कानून का भय पैदा करना भी पुलिस का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने अधिकारियों को लंबित मामलों की नियमित समीक्षा करने और जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए।
बैठक में डीएसपी कंवलजीत सिंह, जिला जेल अधीक्षक सत्येंद्र कुमार, जिला न्यायवादी कर्मवीर राठी, जिला कल्याण अधिकारी कार्यालय के अधीक्षक, डीआईपीआरओ डॉ. मनोज कुमार, संबंधित मामलों के अधिवक्ता, जांच अधिकारी तथा अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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