
चंडीगढ़, 22 अगस्त (नवदेश टाइम्स समाचार सेवा)। हरियाणा में माताओं और नवजात शिशुओं की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने अधिकारियों को प्रदेश में 8 मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (MCH) विंग्स के निर्माण में तेजी लाने और 1 नवंबर तक सभी विशेष नवजात देखभाल इकाइयों (SNCU) को मदर-न्यूबॉर्न केयर यूनिट्स (MNCU) में बदलने के निर्देश दिए हैं।
डॉ. मिश्रा ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की राज्य स्वास्थ्य समिति की कार्यकारी समिति की 12वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को माताओं और नवजात शिशुओं को बेहतर एवं एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दिया।
“मां और नवजात शिशु की देखभाल को एकीकृत व्यवस्था के तहत मजबूत किया जाए, ताकि इलाज के दौरान मां अपने नवजात के करीब रह सके और दोनों के स्वास्थ्य व रिकवरी पर एक साथ ध्यान दिया जा सके।”
— डॉ. सुमिता मिश्रा, अतिरिक्त मुख्य सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग
29 SNCU को MNCU में बदलने की तैयारी
बैठक में SNCU को MNCU में बदलने के प्रस्ताव की समीक्षा की गई। हरियाणा में वर्तमान में 29 SNCU, 62 नवजात स्थिरीकरण इकाइयां (NBSU) और 527 नवजात देखभाल कोने (NBCC) संचालित हैं। डॉ. मिश्रा ने निर्देश दिए कि प्रस्तावित बदलाव को 1 नवंबर तक पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि MCH विंग्स के निर्माण से महिलाओं और बच्चों के लिए समर्पित स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होगा और सरकारी अस्पतालों में एकीकृत स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने की क्षमता बढ़ेगी।
FRU की संख्या 40 से बढ़ाकर 100 की
बैठक में प्रथम रेफरल इकाइयों (FRU) को मजबूत करने की भी समीक्षा की गई। हरियाणा में नामित FRU की संख्या 40 से बढ़ाकर 100 कर दी गई है, ताकि गंभीर या आपात स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार और रेफरल सुविधा मिल सके।
राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के प्रमुख संकेतकों में भी सुधार दर्ज किया गया है। मातृ मृत्यु दर 127 से घटकर 94 और नवजात मृत्यु दर 26 से घटकर 17 हो गई है। वहीं, बाल रोग, स्त्री रोग, मेडिसिन और एनेस्थीसिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में 38 विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती की गई है।
महिला क्लीनिकों को बनाया जाएगा और प्रभावी
डॉ. मिश्रा ने महिला क्लीनिकों की कार्यप्रणाली और सेवा वितरण में सुधार के निर्देश दिए। इन केंद्रों के माध्यम से महिलाओं को उनके घर के नजदीक गर्भावस्था, प्रजनन स्वास्थ्य, मातृ देखभाल और प्रसवोत्तर सेवाएं उपलब्ध करवाने पर जोर दिया जाएगा।
सभी जिला अस्पतालों में बनेंगे बाल देखभाल केंद्र
उन्होंने सभी जिला अस्पतालों में बाल देखभाल केंद्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए। इसका उद्देश्य अस्पतालों में महिलाओं के लिए अधिक सुविधाजनक वातावरण तैयार करना है, खासकर उन महिला कर्मचारियों और आगंतुकों के लिए जिन्हें अस्पताल आने के दौरान बच्चों की देखभाल की आवश्यकता होती है।
आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों को मिलेगा प्रशिक्षण
डॉ. मिश्रा ने आशा कार्यकर्ताओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शुरू करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण में खास तौर पर उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था की पहचान, समय पर रेफरल और फॉलो-अप देखभाल पर जोर दिया जाएगा।
इसके अलावा डॉक्टरों, नर्सों, रेडियोग्राफरों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ के कौशल को बेहतर बनाने के लिए आवश्यकता आधारित सतत चिकित्सा शिक्षा (CME) का वार्षिक कैलेंडर तैयार करने के निर्देश दिए गए।
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