प्रदेश में लागू होगा ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम, 5,714 करोड़ से सुधरेगी जल व्यवस्था और खेती

Navdesh Times
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चंडीगढ़, 21 अगस्त (कुलदीप सैनी ) । हरियाणा सरकार प्रदेश में जल संकट से निपटने और किसानों को टिकाऊ खेती की ओर बढ़ाने के लिए ‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम लागू करने की तैयारी में है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना की तैयारियों की समीक्षा की और इसके निर्धारित लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

जलभराव और सेम प्रभावित जमीन को फिर बनाया जाएगा उपजाऊ 

कृषि मंत्री ने बताया कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जलभराव और सेम प्रभावित भूमि को सुधारकर उसे दोबारा उपजाऊ बनाना है। इसके लिए सब-सरफेस और वर्टिकल ड्रेनेज जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा।

इसके अलावा किसानों को ऐसी फसलों की ओर प्रोत्साहित किया जाएगा, जिनमें पानी की कम खपत होती है। सरकार का उद्देश्य अधिक पानी वाली फसलों का क्षेत्र कम करने के साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है।

“जल सुरक्षा के साथ टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य है।”

2 लाख एकड़ भूमि में ड्रेनेज सिस्टम का लक्ष्य

कार्यक्रम को क्लस्टर आधारित रणनीति के तहत लागू किया जाएगा। झज्जर और रोहतक समेत अन्य प्रभावित क्षेत्रों वाले क्लस्टर-13 में करीब 2 लाख एकड़ भूमि को जलभराव और लवणता की समस्या से मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए चरणबद्ध तरीके से ड्रेनेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।

वहीं कुरुक्षेत्र, कैथल, जींद और करनाल के क्लस्टर-5 में 5 लाख एकड़ क्षेत्र में धान की सीधी बिजाई यानी DSR को बढ़ावा देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

1.12 लाख एकड़ में वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा

सरकार की ‘मेरा पानी मेरी विरासत’ योजना के तहत क्लस्टर-13 में करीब 1.12 लाख एकड़ क्षेत्र में वैकल्पिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही दोनों क्लस्टरों में मिट्टी की जांच के आधार पर जिप्सम और हरी खाद के प्रयोग को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।

5,714 करोड़ रुपये की परियोजना, विश्व बैंक देगा 70 प्रतिशत राशि

‘वाटर सिक्योर हरियाणा’ कार्यक्रम को 2026 से 2032 तक छह वर्षों में लागू करने का प्रस्ताव है। इसकी कुल अनुमानित लागत 5,714.80 करोड़ रुपये है। इसमें 70 प्रतिशत यानी 4,000.36 करोड़ रुपये विश्व बैंक से वित्तीय सहायता के रूप में मिलने प्रस्तावित हैं, जबकि 30 प्रतिशत यानी 1,714.44 करोड़ रुपये हरियाणा सरकार वहन करेगी।

कृषि क्षेत्र से जुड़े कार्यों के लिए 886 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित है। इसमें 436 करोड़ रुपये जलभराव और सेम प्रभावित भूमि के सुधार तथा 450 करोड़ रुपये DSR, फसल विविधीकरण, हरी खाद और जिप्सम के प्रयोग को बढ़ावा देने पर खर्च किए जाएंगे।

किसानों को सीधा लाभ पहुंचाने पर जोर

कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी क्लस्टरों में निर्धारित लक्ष्यों को पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ पूरा किया जाए। सरकार का फोकस जल संरक्षण के साथ किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने पर है।

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